الرئيسية / المقالات / الـخـطـــوبـة مـقـــدمـات ……. و ……. نـتـــائــج

الـخـطـــوبـة مـقـــدمـات ……. و ……. نـتـــائــج

الـخـطـــوبـة
مـقـــدمـات ……. و ……. نـتـــائــج
—————————————-

فـــي الـدنـــيـا الـــتـي نـعـيـشـــهـا، تُـحـيـــط بـــنـا أمـــور قـــد نـــدرك بـعـضـــهـا وقـــد لا نـــدرك الـبـعـــض الآخـــر، قـــد نـــدرك ســـر بـعـضـــهـا، وقـــد لا نـــدرك ســـر الـبـعـــض الآخـــر، لـمـــاذا هـنـــا بـحـــر لا هـنـــاك، هـــنـا حَـــرٌ لا هـــنـاك، نـــرى الـجـمـــال فـيـعـجـبـــنـا، ونـــرى الـقـبـــح فـيـــزعـجـــنـا، نـــرى هـــنـا قـســـوة فـــي الـطـبـيـــعـة، ونـــرى هـــنـا رقـــة فـــي مـكـــان آخــــر مـنـــهـا، نـــرى الأطـيـــار تـهـبـــط عـــلـى الـخـضـــرة، ومـــن الأفـــاعـي مـــن يـعـيـــش فـــي الـصـحـــراء، وفـــي كـــل هـــذا نـــرى مـيـــزانـاً عـجـيـــبـاً، تـكـاثـــر هـــنـا وهـــنـا، وهـــنـاك وهـنـــاك، إنـــهـا ســـنـة الـحـيـــاة الـــتـي خـلـقـــهـا الـلـــه، لـيـظـــل الـتـجـــدد والـنـمـــاء وتـــداول أدوار الـحـيـــاة، مـــن أجـــل الـبـقـــاء لـتـحـقـيـــق عـبـــوديـة الـلـــه تـعـــالـى، وســـواء أكـانـــت عـبـــوديـة قـســـريـة، أم اخـتـيـــاريـة، لـتـتـجـــلـى قـــدرة الـلـــه تـعـــالـى فـــي إبـــداع الـكـــون فـــي كـــل أنـــواعـه وأجـنـــاسـه.

** نـعـــم الـبـشـــر جــنـــس مـــن هـــذا الـكـــون، تـربـطـــه بـالـكـــون عـــلاقــة الـخـلـــق.

** الـبـشـــر كـائـــن ذكـــي اجـتـمـــاعـي، يـحـتـــاج إلـــى مـعــيـــن: يـفـكـــر مـعـــه، ويـعـمـــل مـعـــه.

** مـــن عـجـيـــب خـلـــق الـلـــه تـعـــالـى، قـابـلـيـــة الـتـــوافــق بـيـــن الأنـــواع.

** مـــن أســـرار الـكـــون وعـــد ……… واعـــد …… مـوعـــود ……. !

** الـعـيـــن …… الأذن …… مـداخـــل لـلـقـلـــب، تـحـــرك ســواكـــن شـواطـئـــه.

** هـــلاّ نـظـــرت إلـيـــهـا، فـــإنــه أحـــرى أن يُـــؤدَم بـيـنـكـــمـا.

** كـلـــمـة ….. تـخـتـــرق حـجـــب الـبـــدن لــتــســـتــقــــــر فـــي الـقـلـــب.

** لـيـــس لـلـمـتـحــابـيـــن مـثـــل الـــزواج.

الـخِـطـبـــة: هـــي نـتـيـــجـة عـــن مــيـــل ورغـبـــة فـــي نـيـــة اجـتـمـــاع ذكـــر مـــع أنـثـــى، حـصـــل بـيـنـهـــم تـوافـــق روحـــي أولاً، أرادا أن يُـتَــوِّجـــاه بـالـلـقـــاء الـكـامـــل لـلـــروح والـبـــدن، لـتـحـقــيـــق مـقـصـــد ديـــن الـلـــه تـعـــالـــى الـــذي هـــو:

• الـتـعـــارف.
• الـتــكـاثـــر.

والـخـطـــبـة وعـــد بـالـــزواج مـــن ولـــي أمـــر الـمـــرأة –بـعـــد مـوافـقـتـــهـا– لـلرجـــل أو وكـيـــلـه فـــي الـطـلـــب، حـتـــى إذا تـمـــت الأمـــور وحــــدد كــــــل شـــيء، كـمـــل ذلــك بـالـــزواج.

** الـمـيـــل يـبـــدأ بـخـطـــوة.
** والـــزواج يـبـــدأ بـرغـبـــة.
** الأرواح مـــا تـعـــارف مـنـها اْئـتـلـــف، ومـــا تـنــاكـــر مـنـــهـا اخـتـلـــف.
** الـــروح كـائـــن لـطـيـــف، مـتـصـــرف فـــي الـبـــدن.
** الـبـــدن كـثـيـــف، خـاضـــع لآمـــر نـــاهٍ ( الـــروح ).
** يـطـمـــع كـــل خـاطـــب بـالـلـطـيـــف، مـــع وجـــود الـجـســـم الـكـثـيـــف.
** كـثـــافـــة الـجـســـم، تـــأذن لـلـطـــافـة الـــروح بـالـتـصـــرف، وسـبـيـــل ذلـــك:

– حـســـن الأخـــلاق.
– ثـقـــافــة الـعـقـــل.

** الـحـــب أســـاس الـعـــلاقـة، وكـلـــمـا طغـــت الـــروح عـلـــت وأربـــت، وكـلـــمـا طـغـــى الـبـــدن سـقـطـــت ونـزلـــت.

** الـديـــن سـبـــب الـسـمـــو، فـاظـفـــر بـــذات الـديـــن ( الـمـــرأة ).

** حـســـن مـعـامـــلـة الـخـالـــق، وحـســـن مـعـامـلـــة الـخـلـــق، سـيـاجـــان مـطـلـــوبـان: مَـــن تـرضـــون ديـنـــه وخـلـقـــه ( الـرجـــل ).

** الـرضـــا بـالـديـــن والـخـلـــق، أكـثــر مـــن مـجـــرد مـعـــرفـة أن الـرجـــل: ذو ديـــن وخـلـــق.

** فـاظـفـــر: والـظـفـــر تـحـصـيــــل حـــق ضـائـــع أو شـبـــه مـفـقـــود.

** الأنـــاقـة …… الـرقـــي …… الـمـــودة: لا تـعـنـــي مـجـــرد الـتـكـســـر فـــي الـكـــلام.

** الـرجـــولـة….. الـفـحـــولـة …… الـقــــوامـة: لا تـعـنـــي الـتـسـلـــط الـغـشـــوم والانـفـــراد بـالـسـلـطـــة.

** الأنـــوثـة: خـلـــق رفـيـــع، وديـــن بـديـــع، وخـضـــوع مـسـمـــوح.

** الـرجـــولـة: عـــزة مـــع رحـمـــة، قـــوة مـــع عـــدل، تـصـــرف مـــع عـقـــل.

** الـمـــرأة: مـشـاعـــر …… أحـاسـيـــس ….. نـفـسـيـــة مـرهـفـــة …… دمـيـــة أو طـفـــلـة، فــاخـتـــر الـطـريـــق الـمـوصـــل إلـــى رضـــاهـا.

** الـرجـــل: طـفـــل كـبـيـــر، قـــرارات عـاقـــلـة، ســـاعٍ فـــي الـحـيـــاة، فـاخـتـــاري الـطـريـــق إلـــى رضـــاه.

** الـمـــرأة: فـــي آخـــر مـطـــاف الـرجـــل هـــي ……… سكـنـــه (لـتـسـكـنـــوا إلـيـــهـا)، فـــلا تـسـكـــن لـغـيـــرهـا، ولا تـدعـــي أحـــداً يـسـكـنـــه غـيـــرك، ولـــذا فـمـــن الـبـــدايـة: ابـحـــث عـمـــن تـشـعـــر بـقـلـبـــك أنـــهـا: أنـثـــاك، فـــإن وجـدتـــهـا: فـتـقـــدم لـخـطـبـتـــهـا.

** فـالـخـطـــوبـة: وعـــد جـمـيـــل، بـمـسـتـقـبـــل جـمـيـــل.

** فـالـخـطـــوبـة: الـتـقـــاء أرواح قـبـــل الـبـحـــث عـــن أبدان.

** فـالـخـطـــوبـة: إذن بـمـوعـــود، لا يـحـــل مـنـــه أكـثـــر مـــن الـنـظـــر والـكـــلام والـمـبـــاح.

** فـالـخـطـــوبـة: هـمـــزة وصـــل بـيـــن الـمـاضـــي والـحـاضـــر، فـأحســـن وأحـسـنـــي الاخـتـيـــار.

خـاطـــرة: مـــن أجـمـــل الأيـــام أيـــام الـخـطـــوبـة، شـعـــور بـنـشـــوة، بـكـمـــال الـرجـــولـة والأنـــوثـة، فـيـــهـا تـتـطـلـــع الأنـفـــس لـلـعـطـــاء، فـــمـا أجـمـــل الـهـــدايـا.

فـــي الـمـقـــال الـقـــادم نـتـكـلـــم حـــول مـوضـــوع الـعـقـــد الـشـــرعـي.
والـلـــه أعـلـــم وصـلـــى الـلـــه عـلــى سـيـــدنـا مـحـمـــد.

1436/2/8هـ
2014/11/30م

من يوم الأحد

شاهد أيضاً

سلسلة في أحكام الإيمان – فضيلة الشيخ الدكتور سمير مراد – المجلس التاسع

اترك تعليقاً

لن يتم نشر عنوان بريدك الإلكتروني.